Friday, 23 April 2021

पत्नी की पिटाई।

प्र्शन-  क्या इस्लाम बीवी को मारने का हुक्म देता है? Wife Beating in Islam ?


उत्तर- यह झूठ के सहारे फैलाई गई एक झूठी अफवाह एक गलत फहमी है जो कुरआन की उस आयात को गलत तरीके तोड़ मरोड़ कर पेश  किया जाता अनजान लोगो में भर्म फैलाया   जाता है 


असल बात ये नहीं कि शोहर जब चाहे किसी भी बात पर बीवी को मार सकता है बल्कि कुरआन में यह पूरी बात देखें तो वहां मामला ही कुछ और है।

यह कुरआन की सूरेह 4:आयत 34 नं है! इसमें पूरी बात यह लिखी है कि अगर तुम बीवी में सरकशी देखो यानि अगर बीवी बेवफ़ाई पर उतर आए या बगावत करे या अपनी कोई जिम्मेदारी जो इस्लाम ने उसपर बीवी की हैसियत से डाली है निभाने से इनकार करे यानि तलाक भी ना मांग रही हो और बीवी की तरह भी रहने के लिए तैयार ना हो जिसके नतीजे में घर का निज़ाम ना चल सकता हो तो कुरआन ने शोहर को मशवरा दिया कि उन्हें सीधे तलाक ना दो बल्कि घर बचाने की कोशिश इस तरह करो कि पहले उसे समझाओ! ज़ाहिर है समझाने के भी कई तरीके होते हैं पहले शोहर खुद समझाएगा उससे बात ना बनी तो अपने बड़ों को, अपने घर के शुभचिंतकों को और बीवी के घर वालों को साथ में ला कर भी समझाने की कोशिश करेगा!

इसके बाद भी अगर समझाने में कामयाबी नहीं मिली तो कुरआन ने कहा है कि बीवी से अपना बिस्तर अलग कर दो! यानि बहुत ज़्यादा नाराज़गी का इज़हार करो शायद इस से वो बाज़ आजाए! इसके बाद भी अगर बात नहीं बनी तो उसे सही रास्ते पर लाने के लिए हलकी मार मार सकते हो! जिसे हज़रत मुहम्मद (स) ने फ़रमाया कि इतना ज़ोर से ना मारो कि निशान वगैरा हो जाए (सही मुस्लिम 2950) और मूह पर मारने से भी आप ने माना फ़रमाया!

यह शोहर के हक की आखरी हद है इससे आगे उसे कोई कदम उठाने का हक नहीं, फिर बस तलाक ही आखरी रास्ता है! लेकिन अगर इससे बात बन जाए तो इसी आयत में आगे अल्लाह ने फ़रमाया है कि फिर बीवी को बिलकुल माफ़ कर दो और उससे बदला लेने के बहाने तलाश ना करो! यहाँ देखें 


पति पत्नियों संरक्षक और निगराँ है, क्योंकि अल्लाह ने उनमें से कुछ को कुछ के मुक़ाबले में आगे रहा है,  तो नेक पत्ऩियाँ तो आज्ञापालन करनेवाली होती है और गुप्त बातों की रक्षा करती है, क्योंकि अल्लाह ने उनकी रक्षा की है। और जो पत्नियों ऐसी हो जिनकी सरकशी का तुम्हें भय हो, उन्हें समझाओ और बिस्तरों में उन्हें अकेली छोड़ दो और (अति आवश्यक हो तो) उन्हें मारो भी। फिर यदि वे तुम्हारी बात मानने लगे, तो उनके विरुद्ध कोई रास्ता न ढूढ़ो। अल्लाह सबसे उच्च, सबसे बड़ा है । सूरह 4: आयत 34 


याद रखये यह हक भी सिर्फ एक कंडीशन में दिया गया है जब शोहर तलाक देने से बचना चाहता हो और कोशिश करना चाहता हो कि किसी तरह मेरा परिवार बच जाए! बीवी से बदला लेने के लिए या उसे सज़ा देने के लिए यह नियम बिलकुल नहीं है! और ध्यान रहे इस हाथ उठाने का मतलब भी ज़ुल्म करना नहीं है अगर शोहर ने ऐसे मारा जिसे ज़ुल्म कहते हैं तो फिर वो क़ानूनी सज़ा का हकदार हो जाएगा! 


इस पर सवाल किया जा सकता है कि अगर शोहर अपने फ़र्ज़ ना निभा रहा हो तो क्या बीवी को भी उसे सीधे रास्ते पर लाने के लिए ऐसे ही सब शोहर के साथ करने का हक है ?

तो जी हाँ बीवी उसे समझाएगी, बड़ों को भी बीच में लाएगी, नाराज़गी का इज़हार भी हर तरह से करेगी लेकिन वो शोहर को मार नहीं सकती! और मार इसलिए नहीं सकती क्यों कि वो रिश्ते में बीवी से बड़ा है! जैसे बाप का रिश्ता बेटे से बड़ा होता है इसी लिए बाप हज़ार गलती करे लेकिन बेटे को उस पर हाथ उठाने का हक नहीं है, बाकि वो बाप को सही राह पर लाने के सब तरीके आज़माए गा! लेकिन अगर उसने हाथ उठा दिया तो यह उसके रिश्ते की तौहीन होगी इसी तरह अगर बीवी को भी हाथ उठाने का हक दिया जाए तो फिर शोहर का रिश्ता बड़ा कहाँ रहा ?


क़ुरआन की नसीहत : औरतों के साथ किस तरह पेश आना चाहिए ?

क़ुरआन में अल्लाह ( ईश्वर) ने फ़र्माया है 


तुम औरतों के साथ हुस्ने सुलूक से ज़िन्दगी गुज़ारो और अगर तुम को उन की ( कोई आदत ) अच्छी न लगे ( तो उस की वजह से सख्ती का बर्ताव न किया करो बल्कि उस पर सब्र करो )

क्योंकि , मुमकिन है तुम किसी चीज़ को ना पसंद करो , मगर अल्लाह ने उस में बहुत ज़ियादा भलाई रख दी हो ।


(सूरह निसा 4: आयत11)


आप प्यारे नबी ए करीम सल्ल

लल्लाहु अलैहे वैसल्लम ने फरमाया है की तुम मे से बेहतरिन शख्स वो है जो अपनी बीवी से अच्छा

सलुक करे । ( मिश्कात सफा 282)


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