प्रश्न : Assalaamu alaikum
Facebook के एक ग्रुप में कुछ हिन्दुओं ने कुरआन के बारे मेंये प्रश्न पूछा. कृपया इसका विस्तृत उत्तर दें
1. दो दिन में धरती बनायी (41:9)
2.चार दिन में पहाड बनाये (41:10)
3. दो दिन में सात आकाश बनाये (41:12)
सूरा युनुस 10:3 तुम्हारा रब वही अल्लाह हैं जिसने धरती और आकाशों को 6 दिन में बनाया..
क्या मुल्लों को गिनती नहीं आती हैं?....... 2+4+2=8
इस प्रश्न का उत्तर भाई मुश्फिक सुल्तान ने बहुत अच्छे ढंग से दिया है, वो उत्तर लिखने से पहले मैं अपनी ओर से भी एक बात पाठकों को बता दूं कि जब बात अल्लाह की ओर के दिन की होती है तो वह 24 घण्टे वाला सूर्य दिवस नहीं बल्कि एक निश्चित काल अवधि होता है ये काल अवधि बहुत ज्यादा समय की भी हो सकती है और थोड़े समय की भी जितनी अवधि अल्लाह नियत करना सुनिश्चित करे....
वैसे दिन का अर्थ ही होता है एक निश्चित कालावधि, हमारा सूर्य की चाल के अनुसार 24 घण्टे की समयसीमा मे बंटा दिन भी एक छोटी सी निश्चित कालावधि ही है...
बहरहाल....पवित्र कुरान को पढ़कर ये बात स्पष्ट पता चलती है कि अल्लाह ने अलग अलग कार्यों के लिए अलग अलग समयावधि के काल नियत कर रखे हैं ये कालावधि कहीं मनुष्यों के हिसाब से 1000 वर्ष है तो कहीं 50,000 वर्ष ... तो इस बात को दिमाग़ मे रखकर समझिए कि कुरान मे धरती और आकाश के निर्माण वाले ये दिन मानवीय संसार के दिन नही बल्कि उनसे सम्भवत: हजारों गुना ज्यादा लम्बा काल है ... बल्कि इस बात को यूं समझना चाहिए कि अल्लाह ने ब्रह्माण्ड के निर्माण के लिए कार्य को 6 समान काल अवधियों के चरणों मे बांट कर किया .... अब मुश्फिक भाई का उत्तर पढ़िए गणित के सम्बन्ध मे
उत्तर
ये आयात सूरह 41 फुस्सिलत की हैं
सबसे पहले यह जान लेना चाहिए कि कुरआन की अधिकतर आयात में आसमानों और धरती को ६ दिन (काल) में बना हुआ कहा गया है. उदाहरण के लिए देखिये कुरआन 7:54, 10:3, 11:7; 25:51, 32:4, 50:38, 51:4 आदि. इसके बाद कुरआन की व्याख्या का एक मूल सिद्धांत ध्यान में रखना चाहिए कि कुरआन की कुछ आयात अन्य आयात की व्याख्या करती हैं.
अब आइये आपके प्रश्न की और.
इस प्रश्न करने वाले ने यहाँ गलती यह खायी है कि 9-12 आयात के वर्णन को अनुक्रमिक (sequential) समझ लिया है जबकि यहाँ केवल प्रत्येक वस्तु का निर्माण काल बताया जा रहा है और गहरे अध्यन से पता चलता है कि यहाँ भी अन्य स्थानों की तरह 6 ही दिन (काल) में आकाश और धरती का उत्पन्न होना बताया गया है .
इस सूरह 41 की आयत ११ में जो अरबी शब्द ثم "सुम्मा" आया है उसके शब्दकोष में दो अर्थ हैं
१) फिर/इसके बाद
२) इसके अतिरिक्त/इसके साथ ही
यदि यहाँ पहले अर्थ का प्रयोग किया जाए तो सृष्टि निर्माण की संख्या 8 बनेगी और यह उन आयात के साथ विरोध करेंगी जहां सृष्टि निर्माण का समय 6 दिन बताया गया है . लेकिन इस अर्थ का प्रयोग यहाँ उचित नहीं है बल्कि "सुम्मा" का अर्थ "इसके साथ साथ ही (moreover)'' ऐसा करना ही उचित है. इसका कारण यह है कि कुरआन की सूरह 79 नाज़िआत की आयात 27-33 में स्पष्ट वर्णन है कि धरती और आसमानों की निर्माण प्रक्रिया साथ में ही शुरू हुई क्योंकि धरती भी किसी सौर मंडल और आकाशगंगा का ही भाग है. भूविज्ञान से आज हम यह जानते हैं कि धरती पहले पिघली हुई थी जो जीवन उत्पत्ति के लिए अनुकूल नहीं थी बाद में धरती ठंडी हुई और एक ठोस परत (crust) बन गयी. ध्यान रहे कि यह सब कुछ एक लम्बी प्रक्रिया के अधीन हुआ. इसे चट मंगनी पट ब्याह की तरह नहीं समझना चाहिए . इसके बाद धरती पर पानी उत्पन्न हुआ. पानी ने जीवन की उत्पत्ति को संभव बनाया. साथ ही साथ भूतत्त्व परिवर्तन (geological changes) भी हो रहे थे जिनसे पहाड़ उत्पन्न हुए और वे बड़ी बड़ी नदियों के स्रोत बने और अनेक प्रकार के वृक्ष और जानवर एक लम्बी प्रक्रिया से उत्पन्न हुए.
ये सारा वर्णन इन आयात 27-33 में समाया हुआ है. अब इसी वर्णन को सूरह 41 आयात 9-12 में दोहराया गया है और अब आपके प्रश्न का उत्तर भी मिल गया कि आकाश और धरती का निर्माण कैसे हुआ. तो आइये अब हम फिर से आयात 9-12 के वर्णन की गिनती करते हैं
१) धरती को दो 2 दिन (काल) में पैदा किया
२) धरती के ऊपर एक प्रक्रिया के अनुसार चार 4 दिन (काल) में पहाड़ उत्पन्न किये और तरह तरह के जीवों के लिए भोजन एक ठीक अंदाज़े से उत्पन्न किया
३) ثم "सुम्मा" इसके साथ साथ/समानांतर ही आकाश (धरती से अलग जो कुछ है अर्थात सौर मंडल और आकाशगंगाएं आदि) को दो दिन (काल) में बनाकर संवारा. ध्यान रहे कि आयत 11 में आकाश और धरती के साथ साथ निर्माण प्रक्रिया से गुजरने की और इशारा है और यह भी कहा है के आकाश धुवां था जिसे आज का आधुनिक विज्ञान मान चुका है कि शुरू में ब्रह्माण्ड gaseous form में था. तो इन दो दिन (काल) को और धरती के निर्माण के दो दिन (काल) को दो ही गिना जाएगा 4 नहीं .
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#कायनात ( सृष्टि ) की बनावट के दौर (periods- अवधि)
#क़ुरआन में 6 दिन में कायनात बनने का बयान
अल्लाह रब्बुल आलमीन ने पहले माद्दी कायनात (universe) को बनाया।
जैसा कि हमें मालूम है कि इसकी शुरुआत उस आलमी धमाके से हुई जो वैज्ञानिक दृष्टि के हिसाब से लगभग 13.8 बिलियन साल पहले हुई।
उसके बाद ये कायनात आहिस्ता-आहिस्ता तरक़्क़ी (gradual development) के उसूल पर कायम हुई।
ये मामला अंदाज़न 6 दौर (periods) की शक्ल में सामने आया।
ये बात क़ुरआन में सात बार सित्तति अय्याम (छ दिन) के शब्दों में आई है।
क़ुरआन में जिस चीज़ को अय्याम कहा गया है उससे मुराद अवधि (periods) हैं।
क़ुरआन के 6 दिन (सित्तति अय्याम) को अगर विज्ञान की रोशनी में समझने की कोशिश की जाए, तो वह ये होगा:
#1.बिग बैंग (big bang): विज्ञान के अनुसार लगभग 13.8 बिलियन साल पहले एक कॉस्मिक बॉल (cosmic ball) प्रकट हुआ, फिर उसमें एक बड़ा धमाका हुआ, फिर उसके बाद प्रोसेस हुई, जिससे कायनात ज़ाहिर हुई।
#2.सोलर बैंग (solar bang): उस धमाके के बाद खला (खालीपन) में जो प्रोसेस शुरू हुआ, उसके परिणाम में सूरज और उसके आस-पास के ग्रह वुजूद में आये, इसी दौरान हमारी ज़मीन (planet earth) वुजूद में आई।
#3.वाटर बैंग (water bang): ज़मीन के बनने के बाद एक लंबा प्रोसेस जारी हुआ, उसके बाद ज़मीन पर 2 गैसों की तरकीब से पानी बना, और वो समुन्द्रों में भर गया।
#4.प्लांट बैंग (plant bang): इस प्रोसेस के अगले स्टेप में ज़मीन के ऊपर पेड़-पौधे का वुजूद का कार्य हुआ, अलग-अलग नस्ल के पेड़-पौधों से पूरी ज़मीन ढक गयी।
#5.एनिमल बैंग (animal bang): उसके बाद अगला स्टेप सामने आया, और ज़मीन पर अनगिनत तरह के जीव-जंतु वुजूद में आये।
#6.ह्यूमन बैंग (human bang): आख़री दौर में इंसान वुजूद में आया, और धीरे धीरे पूरी ज़मीन पर फेल गया,
ज़िन्दगी की ये जुदा सूरतें अलग अलग वुजूद में आई।
इन छ दौर (अवधि- periods) का ज़िक्र क़ुरआन में खास अंदाज में आया है, क़ुरआन का गहरा मुताला (स्टडी) करके मालूम किया जा सकता है।
जहां तक पहले दौर की बात है वो क़ुरआन में बिल्कुल खुले लफ़्ज़ों में हैं।
ये बात क़ुरआन की 2 आयतों में बयान की गई हैं।
पहली आयत ये है-:
اَوَ لَمۡ یَرَ الَّذِیۡنَ کَفَرُوۡۤا اَنَّ السَّمٰوٰتِ وَ الۡاَرۡضَ کَانَتَا رَتۡقًا فَفَتَقۡنٰہُمَا ؕ
क्या वे लोग, जिन्होंने (नबी की बात मानने से) इनकार कर दिया है, ये ग़ौर नहीं करते कि ये सब आसमान और ज़मीन आपस में मिले हुए थे, फिर हमने इन्हें अलग किया,
(क़ुरआन 21:30)
दूसरी आयत ये है-:
اَفِی اللّٰہِ شَکٌّ فَاطِرِ السَّمٰوٰتِ وَ الۡاَرۡضِ ؕ
यानी क्या अल्लाह के बारे में शक है जो आसमानों और ज़मीन को फाड़ने वाला है,
इस आयत में फ़ातिर के माना हैं , फाड़ने वाला।
दोनों आयतों में शब्दों के फ़र्क़ के साथ एक ही बात बयान की गई है यानी कायनात शुरू में एक कॉस्मिक बॉल की सूरत में ज़ाहिर हुई, उस कस्मिक बॉल में कायनात के सभी हिस्से मौजूद थे, फिर एक बड़े धमाके से ये पार्ट्स हवा में फेल गए,
फिर एक लंबे प्रोसेस से ये सारे पार्टिकल कायनात के अलग टुकड़ों की सूरत में जमा हो गए।
ये सारा मामला एक इंतहाई खास इंतजाम से हुआ।
इस अमल की कोई दलील इसके सिवा नहीं हो सकती कि एक सर्वशक्तिमान ख़ुदा ने इन सारे कार्य को अंजाम दिया।
मौलाना वहीदुद्दीन खान
अल-रिसाला 2020
✍️ नोट:- कुरआन जिन 6 दिनों का ज़िक्र कर रहा है उन 6 दिनों की अवधि कितनी है इसको अल्लाह के सिवा कोई नहीं जानता, और ना ही हम इसे अपनी तरफ से तय कर सकते हैं, सिर्फ कयास ही लगाया जा सकता है और हम भी इसी कयास की बिना पर इस पोस्ट को शेयर कर रहे हैं।
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