Friday, 15 January 2021

मुसलमान आबादी में असुरक्षा, मुसलमान ही आतंकी क्यों।

सवाल*- *जहाँ मुस्लिम कम होते हैं वहाँ शान्ति की बात करते हैं जहाँ अधिक होते हैं वहाँ दूसरे धर्मों के लोग  सुरक्षित नही रहते? लोकतंत्र वहीं है जहाँ हिन्दू अधिक है ?*

*जवाब* - इस सवाल के बारे में पहले आप खुद खुली बुध्दि से अपने आप से पूछें क्या *UAE, क़तर, ओमान, कुवैत, अरब, बेहरीन* में दूसरे धर्मों के लोग सुरक्षित नहीं है? *अगर नही तो फिर क्यों हमारे देश और दुनिया भर से लाखों (गैर मुस्लिम) लोग वहाँ जा रहे हैं और वहीं लम्बे समय तक बसने वालो की संख्या में निरंतर बढ़ोतरी हो रही है?* जबकि सभी देशों में मुस्लिम 70% से अधिक हैं ??

यदि आप खाड़ी देशों के अलावा देखना चाहते हैं तो एशिया में आप *मलेशिया, इंडोनेशिया ,ब्रूनेई* देख लें । वहाँ भी यही स्थिति है।

यह भी पर्याप्त नहीं तो फिर *तुर्की, जॉर्डन ,लेबनन,मोरोक्को ,इजिप्ट* देख लें। इनके अलावा भी देखना है तो अल्बानिया, सेनेगल, मालदीव्स, northen सायप्रस आदि और भी कई हैं जहाँ मुस्लिम बहुसंख्यक है और दूसरे धंर्मो के लोग सदियों से सुरक्षीत औऱ सम्पन्नता से रह रहे हैं।

 ज़रा खुली बुद्धि से नज़र ही दौड़ा लें ,इसके लिए कोई बोहत गहन अध्धयन करने की भी ज़रूरत नहीं है तो फ़िर यह झूठ क्यों कहा और मान लिया जाता है कि जहाँ मुस्लिम अधिक हैं वहाँ दूसरे धर्मो के लोग सुरक्षित नहीं ??

इसके आगे इस तथ्य पर बात करें कि लोकतंत्र सिर्फ वहाँ है जहाँ हिन्दू अधिक है और कोई मुस्लिम देश सेक्युलर नही है यह तो एक साफ झूठ है जो बस हम पढ़ते हैं और मान लेते हैं। चेक भी करने का कष्ट नही करते। तो आज खुद गूगल का प्रयोग कर चेक करले की कितने देशों और विशेषकर मुस्लिम देशों में लोकतंत्र एवं सेक्युलर स्टेट है ? संक्षिप्त में कुछ के नाम अल्बानिया, अज़रबैजान, बोस्निया,बांग्लादेश , बुर्किनो फासो , चाड, इंडोनेशिया, कज़ाख़स्तान, ताजकिस्तान ,उज़्बेकिस्तान आदि हैं।

कुछ एक जगह और मामलों को हाइलाइट कर ग़लत छवि कैसे बनाई जाती है इस को आसानी से हम इस तरह समझ सकते हैं कि  विश्व धार्मिक असहिष्णुता सूचकांक *(world religious intolerance)* का विश्लेषण करने वाली वैश्विक संस्था *Pew research center analysis report* में ने 2017 की रिपोर्ट में विश्व के 198 देशों में भारत को 4 थे नम्बर पर रखा था। इस कि माने तो विश्व मे अल्पसंख्यको पर धर्म के कारण हो रहे अत्याचार में भारत 4थे नम्बर पर है यानी यहाँ स्तिथि विश्व के कई कुख्यात देशों से भी बुरी है जबकि यह बात सही नहीं है। ना भारत मे ऐसी स्थिति है और यह एक बिल्कुल गलत चित्रण हुआ। दरअसल यह कुछ मोब लीनचिंग और दूसरी कुछ घटनाओं पर  आधारित कर दिया गया।

उसी तरह कुछ एक मामलों को हाइलाइट कर यह बताने का प्रयत्न किया जाता है कि जहां मुस्लिम अधिक है वहाँ दूसरों पर अत्याचार हो रहा है। जो कि बिल्कुल गलत है।

और यदि कोई इस दृष्टिकोण से सहमत हैं  और ऐसे ही विश्लेषण करना चाहता है तो फिर उसको ठीक इसका उल्टा यानिकि यह मानने पर मजबूर होना होगा कि मुस्लिम जहाँ कम हैं वहाँ उन पर अत्याचार हो रहा है। जैसे म्यांमार में रोहिंग्या की पुरी की पुरी आबादी को मार -काट कर निष्कासित कर दिया गया। असम में बोडो ने मुस्लिमो के साथ क्या किया? श्री लंका में मुस्लिमो पर अत्याचार, चिन में अल्पसंख्यको पर अत्याचार! और ऐसे एक दो नही बल्कि विश्व भर में recognized मामले हैं जो सेकड़ो की तादाद में है।

अतः आंकड़ो और भौगोलिक स्थिति पर नज़र डालें तो यह बात सामने आती है कि यह कहना झूठ के सिवा कुछ नही के जहाँ मुसलिम अधिक है वहाँ दूसरे धर्म वाले सुरक्षित नहीं। बल्कि ऐसे कई देश हैं जहाँ गैर मुस्लिम बोहत अच्छी स्थिति में हैं और वे इन मुस्किम बहुल मुल्कों में रहना और बसना पसंद कर रहे हैं।
लेकिन अगर कुछ एक जगहों और मामलों पर ही ध्यान देकर तय करना हो तो फिर  इसके विपरीत इस बात के कई  ज़्यादा साक्ष्य मिलते हैं कि जिस जगह मुस्लिम कम हैं वहाँ वे सुरक्षीत नही है।

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*सवाल- विश्व के 95% आतंकी संघटन मुस्लिम क्यो है ? सीरिया में मुस्लिम मुस्लिमो को ही मार रहै हैं?*


*जवाब-* कुछ वर्षों पहले तक जो यह झूठा प्रोपोगंडा करते थे कि सभी आतंकी संघटन मुस्लिम ही होते हैं? उन्होंने अपने इस झूठ की निरंतर पोल खुलते देख अब 5% का कन्सेशन कर दिया है और अब वे 95% बताने लगे है। 
लैकिन आज भी झूठे ही साबित हो रहे हैं क्योंकि यह 100 % की तरह 95 % भी पूर्ण झूठ एवं निराधर है। इसको जानने के लिये ज़्यादा मेहनत करने की भी आवश्यकता नही बल्कि खुद अपने देश भारत की *national intelligence agency NIA* की लिस्ट अध्यन करलेना ही काफी है। *NIA* द्वारा बैन किये गए आतंकी संघटनो पर नज़र डाले तो 4 दर्जन में 3 दर्जन संघटन का किसी भी तरह से कोई रिश्ता मुस्लिमो से नही है। बचे कुछ *उर्दू* नाम वाले संघटन तो इसमें से कुछ के तो अस्तित्व पर सवाल पूर्व पुलिस/रक्षा अधिकारियो ने ही उठाया और उनको महज सुरक्षा एजेंसियो कि कल्पना करार दिया। जबकि कुछ संघटनो पर कोर्ट में आज तक इलज़ाम साबित नही हुआ।

अगर हम भारत में आतंकी हमलो का विश्लेषण करे तो जिन आतंकी हमलो के नाम पर मुस्लिम समाज के युवाओ को फंसाया गया था, वो सब बाइज्ज़त बरी हुए, मुख्य रूप से *अक्षरधाम* और *संसद* हमले में जिन मुस्लिमो को फंसाया गया वो सब बरी हो गए। मतलब असल हमलावर कोई और थे जिनको बचा लीया गया। लेकिन जब *#अभिनव भारत* जैसे असली आतंकियों को पकड़ा तो भारत में हमले बन्द हो गए।

सिरिया में मुस्लिम मुस्लिमो को मार रहे है..? 

दुनिया मे मुस्लिमो को आतंकी बता कर ,फर्जी आतंकी संघटनो के नाम घड़ कर खुद मुस्लिमो पर आतंकी हमले करना कोई नई बात नही है।

कुछ उदाहरण देखना हो तो अफ़ग़ानिस्तान ज़्यादा पुराना नही है जिस आतंकी संघटन तालिबान को खत्म करने के नाम पर अमेरिका ने पूरे अफ़ग़ानिस्तान को तबाह कर दिया आज वह सरकार बनाने के लिए उसी तालिबान से वार्ताएँ कर रही है।
तो क्या अमेरिका का अब ह्रदय परिवर्तन हो गया है या तालिबान कभी आतंकी संघटन नही था ?

ऐसे अनेक उदाहरण है मंगघड़त मुस्लिम नामो के संघटन या तो घड़ लिये जाते हैं या अपनी आतंकी करतूतों को मुस्लिमो की आड़ में छुपा दिया जाता है। ताकि मासूमो पर हो रहे अत्याचार और आतंकी हमलों पर दुनिया आवाज़ ना उठाये ।

ऐसे ही ISIS के बारे में देखें तो दुनिया के कई राजनेतिक, सामरिक विश्लेषको ने मजबूत दलील के आधार पर ये साबित किया है, कि ISIS मुस्लिम संघटन नही है, बल्कि इज़राइली ख़ुफ़िया एजेंसी *#मोसाद* के द्वारा बनाया गया भाड़े के गैर मुस्लिम अपराधीयो का समूह है। जिसका उद्देश्य मुस्लिम देशो पर हमला कर उनको कमज़ोर कर तेल कुंओ पर कब्जा करना है और *#New World Order* कि नीव रखना है।

जिन्हें इस पर विश्वास न हो वह खुद *israel and state sponsored  terrorism* के बारे में खुद सर्च कर पड़ ले और उनके द्वारा अंजाम दी गई आतंकी घटनाओ के बारे में जान ले।

*Israel defence force के चीफ गादी ऐजेंकोट (gadi ezienkot)* ने खुद कबूल किया था कि उन्होंने सीरिया में विद्रोहियों और आतंकियों को हथियार उपलब्ध कराए थे।

अगर इतना अध्यन ना भी करें तो कुछ  सामान्य बुद्धि (कॉमन सेंस) से ही यह बात पता चल जाती है जैसे :-

अगर ISIS मुस्लिम संघटन है, और उसे इस्लामिक कंट्री बनाना था, तो आज कि तारीख में सबसे आसान काम है किसी मुस्लिम देश का हीरो बनना, *सिर्फ अमेरिका और इज़राइल को दबाना* 
जबकि  ISIS कि गतिविधियों का केन्द्र देखे तो वो सिरिया, इराक, तुर्की, फिलिस्तीन के बिच है ये सब इस्लामिक मुल्क है। और वह इन्हें नुकसान पोहचाने में लगा है।

फिलिस्तीन और इज़राइल संघर्ष कई सालों से चल रहा हे।

अगर ISIS इस्लामिक कंट्री बनाना चाहता था, तो वो इज़राइल पर हमला करता।

# लेकिन इस संघटन ने इस्लामिक मुल्कों पर ही हमला किया।

# इस संघटन के पास ऐसे हथीयार थे, जो उन इस्लामिक देशों के पास भी नही हैं। वे कहाँ से आये?

*हथीयार विश्व मे कितने देश सप्लाय करते है..?*

# इस संघटन के पास इतनी दौलत कहाँ से आगई जो ऐसे हथियार ले रहे हैं जिनको तो कई देश अफ़्फोर्ड ही नही कर सकते ?

ईरान जैसे देशों से तेल खरीदने पर बैन लगाया जा रहा है जबकि ISIS के कब्जे में जो तेल के कुँए थे। उनसे लगातर तेल खरीदा गया। उस पर कोई प्रतिबंध नही लगाया गया। क्यों..? और अमेरिका और यूरोप ने उससे तेल क्यों खरीदा।

# सिरिया के साथ रूस और तुर्की जैसी ताक़त ISIS के खिलाफ लड़ रही। लेकिन ISIS के ना तो हतियार खत्म हो रहे थे, ना ही संसाधन।

# ISIS इतना ताक़तवर संघटन कैसे बना कब बना....? की वो कई देशों से लड़ रहा है ? और खुली भौगोलिक जानकारी होने और अमेरिका ,इजराइल की पास अतः शक्ति होने के बावजूद यह उसे खत्म क्यो नही कर रहे हैं ?जबकि इनके तो पूरे के पूरे देश को सिर्फ 1 आतंकी ढूंढने के लिए ही खत्म करने के रिकॉर्ड हैं।

और भी बहुत कुछ । अतः अब आपको अंदाजा हो गया होगा कि मुस्लिमो को आतंकी बता कर विश्व भर में खुद आतंकी हमलों को अंजाम देने वाले आतंकी कोन है? फिर चाहे वो देश में हो राष्ट्रीय स्तर पर या फिर विश्व मे हो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर।

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