Friday, 15 January 2021

खतों में धमकाना, तलवार से, युद्ध से, इस्लाम कैसे फैला।

*सवाल* :- अगर इसलाम शांति प्रिय मज़हब है तो हज़रत मोहम्मद सलल्लाहो अलैहिवसल्लम ने दूसरे बादशाहों को खत लिखकर धमकाया क्यों कि इसलाम कबुल करो या जंग करो ? और इसलाम के ख़लीफ़ाओं ने बाद में जंगे क्यों की ?

*जवाब* :- बेशक पैग़म्बर/ अंतिम सन्देष्टा ने इसलाम का पैगाम देने के लिए कई बादशाहों को खत लिखे । जिन पर इसलाम समझ कर कई बादशाहों ने इसलाम कबूल भी किया। और कुछ ने नही भी किया।

खत के मज़मून में अल्लाह के पैगम्बर ने बिल्कुल सीधे और साफ शब्दो में इस्लाम का पैगाम दिया और इस बात से भी आगह किया कि यदि आप अल्लाह के भेजे हुए आदेश को नही मानेंगे तो सज़ा के भागी होंगे। और साथ ही अपने सल्तनत की गुमराही के भी ज़िम्मेदार होंगे। क्योंकि इसलाम का पैगाम सभी के लिए है और तुम इसे उन लोगो तक पहुँचने नही दे रहे हो।

लेकिन जैसा की आरोप लगाया गया है। इन खतों में कही भी ये बात नही कही गई कि तुम इसलाम कबुल करो नही तो हमसे जंग करो। अतः यह आरोप बिल्कुल गलत है।

बल्कि हज़रत मुहम्मद सल्ललाहो अलैहि व सल्लम अपने जीवन काल मे सिर्फ एक बार "जंग ए तबुक" के मौके पर बाहरी मुल्क के खिलाफ जंग पर निकले थे। जिसकी वजह भी बाहरी मुल्क के आक्रमण की खबर होना थी। और उस मोके पर भी आखिर में कोई जंग ही नही हुई थी।

रही बात दौरे ए खिलाफत की तो इसमें यह समझना जरूरी है कि उस वक्त कोई आज के जैसा मुल्की निज़ाम या world wide peace treaty  दौर नही था बल्कि बडी बड़ी रियासते आपस में टकराती रहती थी। उस दौर के हिसाब से भी खलीफाओं का बेहतरीन अमल रहा और उन्होने उस वक्त भी कई संधि (treaties) भी की। 
अपने खुद के देश के इतिहास को देखे तो नन्द वंश,मौर्य काल, शुंग वंश,सातवाहन ,गुप्त काल इन सब की उतपत्ति भी युद्ध से ही हुई। 

यह युद्ध और टकराने के दौर तो हाल ही 2nd वर्ल्ड वार तक रहा। तो इसमे बेवजह इस्लामी रियासतों को अलग से निकाल कर कुछ और ही दिखाने की कोशिश की जाती है की सिर्फ वे ही युद्ध करते थे जबकि ऐसा नही था। इतिहास का ज्ञान जिसे भी है वह यह बात बोहत आसानी से समझ सकता है।

इसमे भी इसलाम की खूबी यह रही कि जहाँ ताकतवर हुकूमत सिर्फ दूसरे पर हमला कर राज और क़ब्ज़े का ही सिद्धान्त अपनाती थी। वहाँ भी इसलाम सिर्फ जज़िया देकर कई कमज़ोर रियासतों को युद्ध से बचने और दूसरी बड़ी और ताकतवर रियासतों से सुरक्षा की ज़िम्मेदारी लेकर बिना किसी चिंता के रहने का विकल्प भी देता था।

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 *क्या इस्लाम तलवार से फैला ? एक तार्किक विश्लेषण (logical analysis)।*

अकसर लोग ये इल्ज़ाम लगाते है  कि ईस्लाम तलवार के ज़ोर से फैला, मुस्लिमो ने लूट मार मचाई, बलात्कार किया, अपहरण किया, ये आतंकी होते है..? आदि!

यंही तक नहीं बल्कि ये भी कहा जाता है, कि उपरोक्त लिखी गई बाते इस्लामिक धर्म गर्न्थो में लिखी होती है। 

इस तरह के इल्ज़ाम लगाने वाले भाइयों से निवेदन है, कि वो सोच कर बताये कि अगर इन बातों में रत्ती बराबर भी सच्चाई होती तो क्या आज जो लोग मुस्लमान है, क्या वो इन सब बातों के बावजूद मुस्लिम होते..?

क्या इतने सारे देश मुस्लिम होते..? क्या आज विश्व मे सबसे ज़्यादा तेज़ी से स्वीकार किया जाने वाला धर्म इस्लाम होता ?

बिल्कुल नहीं ..! तो फिर हम इस्लाम कि सच्चाई को जानने की कोशिश क्यों नही करते हैं..?

भारत मे सन 629 में इस्लाम ने प्रवेश किया।कुछ लोग झूठे इतिहास और तथ्यों की बुनियाद पर ऐसे आरोप लगाते हैं की इस्लाम भारत मे अत्याचार से फैला और अधिकांश लोग जांच पड़ताल करे बिना उसे सही मान लेते हैं। उन्हें यह सोचना चाहिए कि क्या इन व्हाट्सएप्प पर झूठे और फेक मेसैज भेजने वालो को क्या *स्वामी विवेकानंद* से ज़्यादा इतिहास का ज्ञान है?
विवेकानंद जी ने इस सोच को की भारत मे इसलाम तलवार से फैला है को एक *पागलपन* बताया है।

उन्ही के शब्दों में :

"_*भारत में मुस्लिम विजय ने उत्पीड़ित, गरीब मनुष्यों को आजादी का जायका दिया था। इसीलिए इस देश की आबादी का पांचवां हिस्सा मुसलमान हो गया। यह सब तलवार के जोर से नहीं हुआ।*_*तलवार और विध्वंस के जरिये हिंदुओं का इस्लाम में धर्मांतरण हुआ, यह सोचना पागलपन के सिवाय और कुछ नहीं है*_।"
(संदर्भःSelected Works of Swami Vivekanand,Vol.3,12th edition,1979.p.294)

 पैगम्बर ऐ इंसानियत, अंतिम सन्देष्टा हजरत मुहम्मद सल० का जन्म 570 ईस्वी में मक्का में हुआ था। लगभग 610  इस्वी में लोगो को इस्लाम कि दावत दी।

▪️ 23 साल मात्र में पूरा अरब मुस्लमान हो गया। (अरब कोई 1 देश नहीं बल्कि आज के दौर के 22 देशों के समूह को अरब कहते है)

और सिर्फ 1 ही सदी में ही पूरे विश्व मे फैल गया।  उस वक़्त दुनिया मे 2 ताक़ते {फारस और रोम} थी जो आज के अमेरिका, रूस और चीन जितनी ताक़तवर थी। और अरब के लोगो के पास तो जंगी/युद्ध का सामान ना के बराबर था। अतः क्या तलवार के दम पर इस्लाम का प्रसार सम्भव था?

और आज 1441 साल बाद भी सभी मुस्लिम देश और बाकी देशों में रह रहे मुस्लिमों के वंशज आज भी मुस्लमान ही है। 
जिस तरह आज दलित/ अश्वेत विश्व भर में इतिहास और उन पर हुए अत्याचारों के प्रति जागरूक है और उस व्यवस्था एवं अपने पूर्वजों पर हुए अत्याचार के प्रति विद्रोह में हैं। तो  अगर इस्लाम अत्याचार या जबरन थोपा गया होता तो ऐसा ही विद्रोह और त्याग मुस्लिम देशों में और मुस्लिम वंशजो में नहीं होता...?

निश्चिंत ही ऐसा नही है, बल्कि यह सभी तो इस्लाम को अपने ह्रदय से आत्मसात किये हुए हैं।

अतः स्पष्ट है कि इस्लाम तलवार, अपहरण, ज़ुल्म सितम से नहीं बल्कि उसकी *सच्चाई/सत्यता/हक़्क़ानियत उसके ईश्वरीय धर्म* होने के कारण फैला है।

*यकीन मानिए अगर आप इस्लाम का अध्ययन करेंगे तो आप भी इस से अकर्षित हुए बिना नही रह सकेंगे।  इस्लाम को (सही स्रोतों से) पड़ कर देख लीजिये*।

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*सवाल:- क्या यह सम्भव है कि इस्लाम युद्ध से फैला?*

*जवाब*  पैगम्बर ऐ इंसानियत, अंतिम सन्देष्टा हजरत मुहम्मद सलल्लाहो अलैहिवसल्लम का जन्म 570ई में मक्का में हुआ था। लगभग 610ई में लोगो को इस्लाम कि दावत दी।

 ▪️23 सालो में पूरा अरब यानी आज के 22 देश के सभी रहवासी मुस्लमान हो गए।

*614/628 में अफ्रिका में*
  628 ई में बेहरीन में
*629 ई में भारत मे*
  632 ई में इराक में
  636 ई में जॉर्डन में
  639 ई में मिस्र में
  640 ई में ईरान में
  641 ई में इजिप्ट में
  670 में अलजीरिया
  7 वी सदी में लेबनान में
  7 वी सदी में लिबिया में
  680 ई में मोरोक्को में
  634 ई में सिरिया में
*618 और 650 ई में चिन में*
*711 में यूरोप में इस्लाम ने प्रवेश किया ।*

और इस तरह सिर्फ 1 सदी में ही पूरेे विश्व में इस्लाम फैल गया। 

*क्या सम्भव है..? युद्ध से इतने सारे देश इतनी जल्दि किसी भी विचार को मानने के लिए तैय्यार हो जाये? और आज तक पीड़ी दर पीड़ी गर्व से उसी धर्म पर मर मिटने को तैय्यार रहे?*

उस वक़्त दुनिया मे 2 ताक़ते {फारस और रोम} थी जो आज के अमेरिका, रूस और चीन जितनी ताक़तवर थी। और अरब के लोगो के पास तो जंगी/युद्ध का सामान ना के बराबर था। अतः क्या तलवार के दम पर इस्लाम का प्रसार सम्भव था?

अतः सपष्ट है कि इस्लाम तलवार, अपहरण, ज़ुल्म सितम से नहीं बल्कि उसकी *सच्चाई/सत्यता/हक़्क़ानियत उसके ईश्वरीय धर्म* होने के कारण फैला है।

अगली पोस्ट में हम देखेंगे कि किस तरह पैगम्बर ए इस्लाम ने छोटे बड़े सभी को इस्लाम का पैगाम पोहचाये और इस सम्बन्ध में खत लिखे।

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*अगर इस्लाम तलवार और युध्द से नहीं फैला तो फिर इसका विस्तार कैसे हुआ ..?*


जैसा कि हमने पिछली पोस्ट में जाना कि इस्लाम ना युद्ध से फैला ना तलवार से और ना ही यह सम्भव है।बल्कि इसलाम तो फैला है *मुहम्मद सलल्लाहो अलैहिवसल्लम* की दावत से। जिन्होंने हर छोटे- बड़े , अमीर-गरीब तक इसलाम का पैगाम पोहचाया।

यँहा उन खास राजाओं, बादशाहो का उल्लेख है, जिन को हज़रत मोहम्मद सलल्लाहो अलैहिवसल्लम ने इस्लाम को मानने के लिए पत्र लिखे। जिस पर उन बदशाओ ने इस्लाम का अध्ययन क़र *इस्लाम* को अपनाया।

*जिन बादशाहों ने पत्र मिलने पर इस्लाम क़ुबूल किया..!*

1) हब्शा के बादशाह( आज के दौर में इथोपिया और Eritrea) नज्जाशी जिनका नाम असहमा बिन अब्ज़र था।

2) मिस्र के बादशाह मुकौकिस।

3) बहरीन के राजा मुंजीर बिन सावी।

4) उमान के राजा जैफर और उनका भाई अब्द दोनो ने इस्लाम क़ुबूल किया।

5) यमन के गवर्नर के द्वारा फारस के बादशाह को पत्र भेजा जिस पर यमन के गवर्नर ने इस्लाम कुबूल किया।

 भारत के राजा *चेरामन पेरुमल* जिनको पत्र तो नहीं लिखा लेकिन इस्लाम के बारे में जानने पर 629 ई में उन्होंने इस्लाम कुबूल किया।

*इसके अलावा और कुछ बादशाहों को भी पत्र लिखे जिन्होंने इस्लाम तो क़ुबूल नहीं किया।पर बाद में इनकी प्रजा इस्लाम कुबूल कर मुसलमान हुई।*

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