सारे कुरआन में कुछ ऐसे शब्दों का प्रोयोग हुआ हैं जिन को समझने में लोगों को ठोकर लगी है। वह शब्द हैं ‘कुर्सी‘ كرسي एवं ‘अर्ष‘ عرش
‘कुर्सी‘ كرسي अरबी भाषा में वस्तु को कहते हैं जिस पर बैठा जाता है। लेकिन इस शब्द का अनेक बार अरबी भाषा में आलंकारिक उपयोग भी होता है जब इसका अर्थ कभी प्रभुता, सत्ता और ताकत होता है और कभी ज्ञान।
इसी आलंकारिक अर्थ में इस का प्रयोग सुरह बकरह 2; आयत 255 में हुआ है जहां फरमाया गया है ,
يَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ ۖ وَلَا يُحِيطُونَ بِشَيْءٍ مِنْ عِلْمِهِ إِلَّا بِمَا شَاءَ ۚ وَسِعَ كُرْسِيُّهُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ
अर्थात – वह जानता है जो कुछ उनके आगे है और जो कुछ उनके पीछे है। और वे उसके ज्ञान में से किसी चीज़ पर हावी नहीं हो सकते, सिवाय उसके जो उसने चाहा। उसकी कुर्सी (ज्ञान) आकाशों और धरती को व्याप्त है [2/255]
इस आयत की तफ़सीर (व्याख्या) स्वयं हदीस में हमें मिलती है जिस से सारी गुत्थी हल हो जाती है। हदीस के मुख्य ग्रंथ बुखारी, कितबे तफ़सीर इस आयत की व्याख्या करते हुए यही लिखा
كرسيه علمه
अर्थात – अल्लाह की कुर्सी से तात्पर्य उसका ज्ञान है [सही बुखारी, कितबे तफ़सीर, तफ़सीर सूरह बकरह]
इस व्याख्या के बाद और किसी व्याख्या की आवश्यकता नहीं है। पवित्र कुरआन के एक महत्वपूर्ण शब्दकोश, इमाम रागिब की ‘मुफ़्रदात अल्क़ुरआन’ में भी इस आयत की यही व्याख्या की गई है।
‘अर्ष‘ عرش शब्द अरबी भाषा में वास्तव में छत वाली चीज़ को कहते हैं। इसलिए पवित्र कुरआन के महत्वपूर्ण शब्दकोश, ‘मुफ़्रदात अल्क़ुरआन’ में यही लिखा है
العرش في الأصل: شئ مسقف و جمعه عروش
अर्थात – ‘अल-अर्ष’ अपने धातु में कहते हैं छत वाली चीज़ को और इसका जमा (बहुवचन) ‘ऊरूष’ है।
पवित्र कुरआन में भी है,
وَهِيَ خَاوِيَةٌ عَلَىٰ عُرُوشِهَا व हिय खावियतुन अला उरूषिहा
अर्थात- जो अपनी छतों के बल गिरी हुई थी। [सूरह बकरह 2; आयत 259]
अंगूर की बेल के ऊपर चढ़ाने में भी इस शब्द का प्रयोग होता है। बांस आदि की जालियों पर चढ़ाई हुई बेल को معرش ‘मुआर्रष‘ भी कहा जाता है। पवित्र कुरआन में है
مَعْرُوشَاتٍ وَغَيْرَ مَعْرُوشَاتٍ मारूषातिन व गैरु मारूषातिन
अर्थात – कुछ जालियों पर चढ़ाए जाते है और कुछ नहीं चढ़ाए जाते [सूरह अनाम 6; आयत 141]
इसी से बादशाह के तख्त (सिंहासन) को भी उसकी ऊंचाई के कारण ‘अर्ष‘ कहा जाता है। क्योंकि छत भी ऊंची होती है।
अल्लाह के लिए पवित्र कुरआन में ‘अर्ष‘ शब्द का चार प्रकार प्रयोग हुआ है। उन सब स्थानों में इसका आलंकारिक रूप में वर्णन हुआ है। यह स्वयं कुरआन से सिद्ध है। उदाहरण के लिए देखिए
إِنَّ رَبَّكُمُ اللَّهُ الَّذِي خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ فِي سِتَّةِ أَيَّامٍ ثُمَّ اسْتَوَىٰ عَلَى الْعَرْشِ ۖ يُدَبِّرُ الْأَمْرَ
निस्संदेह तुम्हारा रब वही अल्लाह है, जिसने आकाशों और धरती को छः दिनों (कालों) में पैदा किया, और सिंहासन पर विराजमान हुआ; व्यवस्था चला रहा है। [सूरह यूनुस 10; आयत 3]
अर्थात धरती और आकाशों पर उसी की प्रभुता है और वही उनकी व्यवस्था चला रहा है। यहाँ से स्पष्ट हो गया कि اسْتَوَىٰ عَلَى الْعَرْشِ के अर्थ अपनी रचना पर प्रभुता और उसकी व्यवस्था है।
इसीलिए ‘मुफ़्रदात अल्क़ुरआन’ में यही लिखा
وكني به عن العز و السلطان و المملكة
बतौर मुहावरा ‘अर्ष‘ (सिंहासन) का शब्द सम्मान, प्रभुता और राज्य के अर्थों में बोला जाता है।
तो अल्लाह के शरीरधारी होने का प्रश्न ही नहीं है, क्योंकि यह एक आलंकारिक विवरण है।
[आर्यों को जवाब – अल्लाह के स्वरूप के बारे में शंका का समाधान | Mushafiq Sultan] is good,have a look at it! http://mushafiqsultan.com/allah-arsh-arya-jawab-sky/
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