मौत के बाद क्या
पुनर्जन्म
या हिसाब_किताब??
1 चलिए हम पहली बात पर विचार करें अगर मौत के बाद पुनर्जन्म होता है तो क्या होगा
पुनर्जन्म याने कि बार बार पैदा होना
और बार बार मरना
कहा जाता है कि चौसठ_हजार_योनी है, जिसमें मानुष को जन्म लेना होता है और कोई कहता है कि ,
ये चौसठ हजार योनी मैं जन्म मानुष के कर्म के अनुसार होते हैं जिसके कर्म अच्छे होते हैं उसे अच्छी योनी मैं जन्म मिलता है
जबकि विज्ञान के अनुसार हजारों लाखों साल पहले दुनिया मैं बड़े बड़े जिव याने डायनासोर रहते थे!!!
जब मानुष नहीं थे या बहुत कम होंगे ईश्वर जाने।
फिर हम देख रहे हैं कि जैसे जैसे समय बीत रहा है मानव जाती कि जनसंख्या बढती जा रही है ,
तो फिर बाकी मानुष कहाँ से आ रहें है
जबकि पुनर्जन्म ही हो रहा है
और कुछ तो ये कहते हैं कि ,
बहुत अच्छे कर्म करने वाले मानुष मुक्ति पा लेता है फिर वह पुनर्जन्म नहीं लेता।
अगर कर्मों के आधार पर योनी में जन्म होता है ,
तो मानुष योनी सबसे अच्छी है ,
फिर इतने मनुष्यों कि जनसंख्या क्यों बड रही है ,
जबकि अभी कलयुग चल रहा है और इस युग मैं पापी ज्यादा है।
इस हिसाब से तो मनुष्यों कि जनसंख्या कम होनी चाहिए थी
और दूसरे निम्न योनी वाले जंतु ज्यादा होने थे
ईश्वर पूरी सृष्टि का करता धरता है और कहते हैं कि ईश्वर अन्याय नहीं करता याने ईश्वर सबके साथ न्याय करेगा जो जैसा करेंगे उस को सजा जरूर देगा।
पुनर्जन्म भी न्याय करने कि एक प्रक्रिया मानी जाती है।
याने जिसने बुरे काम किये उसे ईश्वर अगले जन्म मैं
निम्न_योनी मैं पैदा करता है ,
जिससे वह अपने कर्मों का फल भुगते ,
लेकिन उस बेचारे को तो सजा मिल रही है ,
पर उसे ये नहीं मालूम होता कि किस_बात_कि_सजा मिल रही है।
कभी कभी मानुष योनी में भी जब कोई विकलांग पैदा होता है या बाद में उस पर कोई मुसीबत आती है और वह विकलांग हो जाता है तो लोग कहते है इसके पिछले जन्म का पाप है।
लेकिन बेचारे को ये नहीं मालूम होता है कि उसने पिछले जन्म मैं क्या पाप किये थे।
तो ये कैसा न्याय है कि ईश्वर उसे सजा देता है पर उसे नहीं मालूम कि उसे किस चीज कि सजा मिल रही है।
दुनिया मैं किसी भी देश का ये कानून नहीं कि वह जब मुजरिम को सजा दे तो उसे नहीं बताये कि उसने क्या जुर्म किया।
दूसरी बात ये कि जिस पर जुल्म हुआ उसकी सजा जुल्म करने वाले को दी जा रही है कि नहीं ये भी जुल्म सहने वाले को पता नहीं।
फिर ईश्वर ऐसा अन्याय क्यों करेगा
इस पुनर्जन्म वाले सिद्धांत मैं तो ये भी नहीं पता चलता कि ईश्वर ने ये दुनिया क्यों बनाई
कुछ कहते है लीला (खेल) करने को
लेकिन ईश्वर ऐसा क्यों करेगा???
उसे खेल खेने ली क्या आवशकता
2. चलिए अब दूसरे पहलु पर गौर करें कि ,
मौत के बाद हिसाब किताब होगा।
ईश्वर ने ये दुनिया मानुष कि परीक्षा लेने के लिए बनाई कि वह ये लोगों को बता दे कि कौन बुरा है और कौन अच्छा
ये वह उनके द्वारा दुनिया में किये गए कर्मों के आधार पर होगा।
मानुष को दुनिया मैं एक बार मौका मिलता है ये साबित करने का कि वह अच्छा है या बुरा उसके बाद उसको मौत आ जाती है ,
फिर वह दुनिया मैं कभी जन्म नहीं लेता।
इसी प्रकार हजारों हजारों सालों से अलग अलग मानुष जन्म ले रहे है और दुनिया में जी कर अपने को अच्छा और बुरा साबित कर रहे हैं।
फिर ईश्वर इन सभी को एक दिन जीवित करेगा और इनका हिसाब किताब करेगा कि लोग जान जाएँ कि वह अच्छे है या बुरे जिसने अच्छे कर्म किये होंगे वह स्वर्ग मैं रहेंगे और जिन्होंने बुरे कर्म किये होंगे वह नर्क मैं रहेंगे।
और सबके साथ न्याय होगा जिनको नर्क मैं सजा मिलेगी वह ये जानते होंगे कि उनको ये सजा क्यों दी जा रही है और जो स्वर्ग मैं होंगे तो उनको पता होगा कि वह स्वर्ग मैं क्यों है।
आप ये भी सोच रहे होंगे कि सबका हिसाब किताब
एक ही दिन क्यों जब जो मरे उसे तभी उसके कर्मों के अनुसार स्वर्ग या नर्क मैं डाल देना चाहिए।
तो ऐसा है कि मानुष अपने छोटे से जीवन मैं कुछ अच्छे और कुछ बुरे काम ऐसे कर जाता है जिसका प्रभाव उसके मरने के कई साल तक होता है।
तो जैसा प्रभाव होगा उसे वैसे पुन्य या पाप मिलते रहेगे मरने के बाद भी
जैसे किसी ने पैड़ लगाया, या हॉस्पिटल खोला अब जब तक लोग उनसे फायदा उठाएंगे तब तक उसे पुन्य मिलेगा।
वैसे ही किसी ने जुआखाना खोला या शराबखाना खोला और मर गया तो उसे जब तक पाप लगेगा जब तक ये चालू रहेंगे।
और किसी ने किसी के साथ ज्यादती कि दुनिया मैं तो उसे उस दिन सजा मिलेगी और ज्यादती सहने वाला ये देख लेगा कि उस पर ज्यादती करने वाले को ईश्वर ने सजा दी।
अब दोनों बातें आपके सामने है। यदि इसके अलावा और कोई विकल्प होतो बताएं।और आप किस बात से सहमत है ये भी बताएं
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